history of India: क्या आप जानते हो भारत का गौरवशाली इतिहास

भारत भौगोलिक दृष्टि से विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या की दृष्टि से यह चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है.....

history of India: क्या आप जानते हो भारत का गौरवशाली इतिहास

भारत (आधिकारिक नाम: भारत गणराज्य) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। भारत भौगोलिक दृष्टि से विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या की दृष्टि से यह चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत की सीमा पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर पूर्व में चीन (तिब्बत), नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यांमार से लगती है। हिंद महासागर में यह दक्षिण-पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया के साथ एक समुद्री सीमा साझा करता है। इसके उत्तर में हिमालय पर्वत और दक्षिण में हिंद महासागर स्थित है। दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर है।

आधुनिक मानव या होमो सेपियन्स 55,000 साल पहले अफ्रीका से भारतीय उपमहाद्वीप में आए थे। वे 1,000 साल पहले सिंधु नदी के पश्चिमी किनारे पर बसे थे, जहां से वे धीरे-धीरे चले गए और सिंधु घाटी सभ्यता में विकसित हुए. 1,200 ईसा पूर्व तक, संस्कृत भाषा पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैल गई थी और तब तक यहां हिंदू धर्म का उदय हो चुका था और ऋग्वेद की रचना भी हो चुकी थी. 400 ईसा पूर्व तक, हिंदू धर्म में जातिवाद देखा जाता है। उसी समय बौद्ध और जैन धर्म का जन्म हो रहा है। प्रारंभिक राजनीतिक समेकन ने गंगा बेसिन में स्थित मौर्य और गुप्त साम्राज्यों को जन्म दिया। उनका समाज व्यापक रचनात्मकता से भरा हुआ था।

प्रारंभिक मध्ययुगीन काल में, ईसाई धर्म, इस्लाम, यहूदी और पारसी धर्म ने भारत के दक्षिणी और पश्चिमी तटों पर जड़ें जमा लीं। मध्य एशिया की मुस्लिम सेनाओं ने भारत के उत्तरी मैदानों, अंततः दिल्ली पर अत्याचार करना जारी रखा। सल्तनत की स्थापना हुई और उत्तर भारत को मध्यकालीन इस्लामी साम्राज्य में मिला लिया गया। 15वीं शताब्दी में, विजयनगर साम्राज्य ने दक्षिण भारत में एक लंबे समय तक चलने वाली मिश्रित हिंदू संस्कृति का निर्माण किया। पंजाब में सिख धर्म की स्थापना हुई। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का धीरे-धीरे विस्तार हुआ, भारत को एक औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में बदल दिया और अपनी संप्रभुता को मजबूत किया. 1858 में ब्रिटिश शासन शुरू हुआ। धीरे-धीरे एक प्रभावशाली राष्ट्रवादी आंदोलन उभरने लगा जो अपने अहिंसक विरोध के लिए जाना जाता था और ब्रिटिश शासन के अंत में एक प्रमुख कारक बन गया। 1947 में, ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य को दो स्वतंत्र प्रभुत्वों, भारतीय डोमिनियन और पाकिस्तान के डोमिनियन में विभाजित किया गया था, जो धर्म के आधार पर विभाजित थे.

भारत 1950 से एक संघीय गणराज्य है। भारत की जनसंख्या 1951 में 36.1 करोड़ से बढ़कर 2011 में 121.1 करोड़ हो गई। प्रति व्यक्ति आय $64 से बढ़कर $1,498 हो गई और इसकी साक्षरता दर 16.6% से बढ़कर 74% हो गई। भारत तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं का केंद्र बन गया है। भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में उल्लेखनीय और अद्वितीय प्रगति की है। भारतीय फिल्में, संगीत और आध्यात्मिक शिक्षाएं वैश्विक संस्कृति में विशेष भूमिका निभाती हैं। भारत ने गरीबी दर को काफी हद तक कम किया है। भारत परमाणु बम वाला देश है। भारत का पाकिस्तान और चीन के साथ कश्मीर और भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन सीमा पर विवाद चलता रहता है। लिंग असमानता, बाल शोषण, बाल कुपोषण, गरीबी, भ्रष्टाचार, प्रदूषण आदि भारत के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। 21.4% क्षेत्र वन है। त्रिमोहिनी संगम भी उन 12 बैंकों में से एक है, 12 फरवरी वर्ष 1948 में महात्मा गांधी के अस्थि कलश जिन 12 तटों पर विसर्जित किए गए थे, त्रिमोहिनी संगम भी उनमें से एक है. 

नामपद्धति (nomenclature)

भारत के दो आधिकारिक नाम (official names) हैं - हिंदी में भारत (Bharat) और अंग्रेजी में इंडिया (India) .  इंडिया (India) नाम सिंधु नदी के अंग्रेजी नाम "सिंधु" से लिया गया है। श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित एक पौराणिक कथा के अनुसार, भारत नाम एक प्राचीन सम्राट भरत, मनु के वंशज और ऋषभदेव के सबसे बड़े पुत्र के नाम से लिया गया है। एक व्युत्पत्ति के अनुसार, भारत शब्द (भा + रत) का अर्थ है आन्तरिक प्रकाश या विदेक-रूपी प्रकाश में लीन। एक तीसरा नाम हिन्दुस्तान भी है जिसका अर्थ हिन्द की भूमि, यह नाम विशेषकर अरब तथा ईरान में प्रचलित हुआ। बहुत पहले भारत का एक मुंहबोला नाम सोने की चिड़िया भी प्रचलित था। संस्कृत महाकाव्य महाभारत में वर्णित है की वर्तमान उत्तर भारत का क्षेत्र भारत के अंतर्गत आता था। भारत को बहुत से अन्य नामों भारतवर्ष, आर्यावर्त, इंडिया, हिन्द, हिंदुस्तान, जम्बूद्वीप आदि से भी जाना जाता है।

इतिहास (History)

प्राचीन (Ancient)

लगभग 55,000 वर्ष पहले (प्राचीन भारत Ancient India) आधुनिक मानव (Modern humans) या होमो सेपियन्स (Homo sapiens) अफ्रीका से भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचे थे। दक्षिण एशिया में ज्ञात मानव का प्राचीनतम अवशेष 30,000 वर्ष पुराना है। भीमबेटका, मध्य प्रदेश की गुफाएँ भारत में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण हैं जो आज भी देखने को मिलता है। प्रथम स्थाई बस्तियों ने 9000 वर्ष पूर्व स्वरुप लिया था। 6,500 ईसा पूर्व तक आते आते मनुष्य ने खेती करना, जानवरों को पालना तथा घरों का निर्माण करना शुरू कर दिया था जिसका अवशेष मेहरगढ़ में मिला था जो कि अभी पाकिस्तान में है। यह धीरे-धीरे सिंधु घाटी सभ्यता के रूप में विकसित हुए, जो की दक्षिण एशिया की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यता है। यह 2600  ईसा पूर्व और 1900 ईसा पूर्व के मध्य अपने चरम पर थी। यह वर्तमान पश्चिम भारत तथा पाकिस्तान में स्थित है। यह मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धोलावीरा, और कालीबंगा जैसे शहरों के आसपास केंद्रित थी और विभिन्न प्रकार के निर्वाह पर निर्भर थी, यहाँ व्यापक बाजार था तथा शिल्प उत्पादन होता था।

2000 से 500 ईसा पूर्व तक ताम्र पाषाण युग संस्कृति से लौह युग का आगमन हुआ। इसी युग को हिन्दू धर्म से जुड़े प्राचीनतम धर्म ग्रंथ, वेदों का रचनाकाल माना जाता है।  तथा पंजाब तथा गंगा के ऊपरी मैदानी क्षेत्र को वैदिक संस्कृति का निवास स्थान माना जाता है। कुछ इतिहासकारों का मानना है की इसी युग में उत्तर-पश्चिम से भारतीय-आर्यन का आगमन हुआ था। इसी अवधि में जाति प्रथा भी प्रारंम्भ हुई थी।

वैदिक सभ्यता में ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी में गंगा के मैदानी क्षेत्र तथा उत्तर-पश्चिम भारत में छोटे-छोटे राज्य तथा उनके प्रमुख मिल कर 16 कुलीन और राजशाही में सम्मिलित हुए जिन्हे महाजनपद के नाम से जाना जाता है। बढ़ते शहरीकरण के बीच दो अन्य स्वतंत्र अ-वैदिक धर्मों का उदय हुआ। महावीर के जीवन काल में जैन धर्म अस्तित्व में आया। गौतम बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित बौद्ध धर्म ने मध्यम वर्ग के अनुयायिओं को छोड़कर अन्य सभी वर्ग के लोगों को आकर्षित किया। इसी काल में भारत का इतिहास लेखन प्रारम्भ हुआ। बढ़ती शहरी सम्पदा के युग में, दोनों धर्मों ने त्याग को एक आदर्श माना, और दोनों ने लंबे समय तक चलने वाली मठ परंपराओं की स्थापना की। राजनीतिक रूप से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक मगध साम्राज्य ने अन्य राज्यों को अपने अंदर मिला कर मौर्य साम्राज्य के रूप में उभरा। मगध ने दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरे भारत पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया लेकिन कुछ अन्य प्रमुख बड़े राज्यों ने इसके प्रमुख क्षेत्रों को अलग कर लिया। मौर्य राजाओं को उनके साम्राज्य की उन्नति के लिए तथा उच्च जीवन सतर के लिए जाना जाता है क्योंकि सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म की स्थापना की तथा शस्त्र मुक्त सेना का निर्माण किया। 180 ईसवी के आरम्भ से मध्य एशिया से कई आक्रमण हुए, जिनके परिणामस्वरूप उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में यूनानी, शक, पार्थी और अंततः कुषाण राजवंश स्थापित हुए। तीसरी शताब्दी के आगे का समय जब भारत पर गुप्त वंश का शासन था, भारत का स्वर्णिम काल कहलाया।

तमिल के संगम साहित्य के अनुसार  200 BC से 200 AD तक दक्षिण प्रायद्वीप पर चेर राजवंश, चोल राजवंश तथा पाण्ड्य राजवंश का शासन था जिन्होंने बड़े सतर पर भारत और रोम के व्यापारिक सम्बन्ध और पश्चिम और दक्षिण पूर्व एशिया के साम्राज्यों के साथ व्यापर किया। चौथी-पांचवी शताब्दी के बीच गुप्त साम्राज्य ने वृहद् गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रशासन तथा कर निर्धारण की एक जटिल प्रणाली बनाई; यह प्रणाली बाद के भारतीय राज्यों के लिए एक आदर्श बन गई। गुप्त साम्राज्य में भक्ति पर आधारित हिन्दू धर्म का प्रचलन हुई। विज्ञान, कला, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र, प्राचीन प्रौद्योगिकी, धर्म, तथा दर्शन इन्हीं राजाओं के शासनकाल में फले-फूले, जो शास्त्रीय संस्कृत में रचा गया।

मध्यकालीन (medieval)

600 से 1200 के बीच का समय क्षेत्रीय राज्यों में सांस्कृतिक उत्थान के युग के रूप में जाना जाता है। कन्नौज के राजा हर्ष ने 606 से 647 तक गंगा के मैदानी क्षेत्र में शासन किया तथा उसने दक्षिण में अपने राज्य का विस्तार करने का प्रयास किया किन्तु दक्क्न के चालुक्यों ने उसे हरा दिया। उसके उत्तराधिकारी ने पूर्व की और राज्य का विस्तार करना चाहा लेकिन बंगाल के पाल शासकों से उसे हारना पड़ा। जब चालुक्यों ने दक्षिण की और विस्तार करने का प्रयास किया तो पल्ल्वों ने उन्हें पराजित कर दिया, जिनका सुदूर दक्षिण में पांड्यों तथा चोलों द्वारा उनका विरोध किया जा रहा था। इस काल में कोई भी शासक एक साम्राज्य बनाने में सक्षम नहीं था और लगातार मूल भूमि की तुलना में दुसरे क्षेत्र की ओर आगे बढ़ने का क्रम जारी था। इस अवधि में नये शासन के कारण जाति में बांटे गए सामान्य कृषकों के लिए कृषि करना और सहज हो गया। जाति व्यवस्था के परिणामस्वरूप स्थानीय मतभेद होने लगे।

6 और 7 वीं शताब्दी में, पहली भक्ति भजन तमिल भाषा में बनाया गया था। पूरे भारत में उनकी नकल की गई और हिंदू धर्म के पुनरुत्थान और इसने उपमहाद्वीप की सभी आधुनिक भाषाओं के विकास का नेतृत्व किया। राजघरानो ने लोगों को राजधानी की आकर्षित किया। शहरीकरण के साथ शहरों में बड़े स्तर पर मंदिरों का निर्माण किया। दक्षिण भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का प्रभाव दक्षिण एशिया के देशों म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया और जावा में देखा जा सकता है।

10वीं शताब्दी के बाद घुमन्तु मुस्लिम वंशों ने जातियता तथा धर्म द्वारा संघठित तेज घोड़ों से युक्त बड़ी सेना के द्वारा उत्तर-पश्चिमी मैदानों पर बार बार आकर्मण किया, अंततः 1206 इस्लामीक दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई। उन्हें उतर भारत को अधिक नियंत्रित करना था तथा दक्षिण भारत पर आकर्मण करना था। भारतीय कुलीन वर्ग के विघटनकारी सल्तनत ने बड़े पैमाने पर गैर-मुस्लिमों को स्वयं के रीतिरिवाजों पर छोड़ दिया। 13वीं शताब्दी में मंगोलों द्वारा किये के विनाशकारी आकर्मण से भारत की रक्षा की। सल्तनत के पतन के कारण स्वशासित विजयनगर साम्राज्य का मार्ग प्रशस्त हुआ। एक मजबूत शैव परंपरा और सल्तनत की सैन्य तकनीक पर निर्माण करते हुए साम्राज्य ने भारत के विशाल भाग पर शासन किया और इसके बाद लंबे समय तक दक्षिण भारतीय समाज को प्रभावित किया।

भाषाएँ (languages)

भाषाओं के मामले में भारतवर्ष विश्व के समृद्धतम देशों में से है। संविधान के अनुसार हिन्दी भारत की राजभाषा है, और अंग्रेजी को सहायक राजाभाषा का स्थान दिया गया है। 1947-1950 के संविधान के निर्माण के समय देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भाषा और हिन्दी-अरबी अंकों के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप को संघ (केंद्र) सरकार की कामकाज की भाषा बनाया गया था, और गैर-हिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी के प्रचलन को बढ़ाकर उन्हें हिन्दी-भाषी राज्यों के समान स्तर तक आने तक के लिये 15 वर्षों तक अंग्रेजी के इस्तेमाल की इजाज़त देते हुए इसे सहायक राजभाषा का दर्ज़ा दिया गया था। संविधान के अनुसार यह व्यवस्था 1950 में समाप्त हो जाने वाली थी, लेकिन् तमिलनाडु राज्य के हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन और हिन्दी भाषी राज्यों राजनैतिक विरोध के परिणामस्वरूप, संसद ने इस व्यवस्था की समाप्ति को अनिश्चित काल तक स्थगित कर दिया है। इस वजह से वर्तमान समय में केंद्रीय सरकार में काम हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषाओं में होता है और राज्यों में हिन्दी अथवा अपने-अपने क्षेत्रीय भाषाओं में काम होता है। केन्द्र और राज्यों और अन्तर-राज्यीय पत्र-व्यवहार के लिए, यदि कोई राज्य ऐसी मांग करे, तो हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं का होना आवश्यक है। 

हिन्दी और अंग्रेज़ी के इलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में 20 अन्य भाषाओं का वर्णन है जिन्हें भारत में आधिकारिक कामकाज में इस्तेमाल किया जा सकता है। संविधान के अनुसार सरकार इन भाषाओं के विकास के लिये प्रयास करेगी, और अधिकृत राजभाषा (हिन्दी) को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए इन भाषाओं का उपयोग करेगी। आठवीं अनुसूची में दर्ज़ 22 भाषाएँ यह हैं:

  • संस्कृत
  • हिन्दी
  • अंग्रेजी
  • मराठी
  • नेपाली
  • मैथिली
  • पंजाबी
  • तमिल
  • तेलुगू
  • मलयालम
  • कन्नड
  • गुजराती
  • बांग्ला
  • असमिया
  • ओड़िया
  • कश्मीरी
  • मणिपुरी
  • कोंकणी
  • डोगरी
  • उर्दू
  • सिन्धी
  • संथाली

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