Kohinoor हीरे का इतिहास, कहां गायब हुआ और किसका था इसमें हाथ, देखिए

कोहिनूर हीरा एक प्रकार का रत्न है। विभिन्न नगों एवं रत्नों में सबसे अद्भुत रत्न है हीरा। राजा-महाराजाओं को भी हीरा अधिक प्रिय रहता था। सभी प्रकार के हीरों में “कोहिनूर” सबसे प्रसिद्ध, पुराना एवं महंगा हीरा है। यह जगमगाता हीरा अत्यंत ही बेशकीमती है।

कोहिनूर हीरा एक प्रकार का रत्न है। विभिन्न नगों एवं रत्नों में सबसे अद्भुत रत्न है हीरा। राजा-महाराजाओं को भी हीरा अधिक प्रिय रहता था। सभी प्रकार के हीरों में “कोहिनूर” सबसे प्रसिद्ध, पुराना एवं महंगा हीरा है। यह जगमगाता हीरा अत्यंत ही बेशकीमती है। कोहिनूर का अर्थ “प्रकाश का पर्वत” या “प्रकाश की श्रंखला” होता है। इसकी शुरुआत आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की कोल्लूर खदान से माना जाता है, परंतु फिर भी कोहिनूर को कई देश अपना होने का दावा करते हैं। हाल ही में कोहिनूर हीरा उसके असली जगह को ले कर सभी की चर्चा का विषय बना हुआ है।

कोहिनूर एक 105 कैरेट (21।6 ग्राम) का हीरा है जो किसी समय विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात हीरा रह चुका है। कहा जाता है कि यह हीरा भारत की गोलकुंडा की खान से निकाला गया था। 'कोहिनूर' का अर्थ है- आभा या रोशनी का पर्वत। यह कई मुगल व फारसी शासकों से होता हुआ, अन्ततः ब्रिटिश शासन के अधिकार में लिया गया, व उनके खजाने में शामिल हो गया, जब ब्रिटिश प्रधान मंत्री, बेंजामिन डिजराएली ने महारानी विक्टोरिया को 1877 में भारत की सम्राज्ञी घोषित किया।

अन्य कई प्रसिद्ध जवाहरातों की भांति ही, कोहिनूर की भी अपनी कथाएं रही हैं। इससे जुड़ी मान्यता के अनुसार, यह पुरुष स्वामियों का दुर्भाग्य व मृत्यु का कारण बना, व स्त्री स्वामिनियों के लिये सौभाग्य लेकर आया। अन्य मान्यता के अनुसार, कोहिनूर का स्वामी संसार पर राज्य करने वाला बना।

हम आपको बताना चाहते है कि हीरे, जवाहरात, मोती, विभिन्न नग आदि में कोहिनूर हीरे का इतिहास बहुत ही पुराना रहा है। इसका इतिहास लगभग 5000 वर्ष पुराना है। कोहिनूर कई देश का सफर करते हुए कई राजा महाराजाओं के हाथों से होते हुए अंततः वर्तमान में लंदन के टावर में सुरक्षित रखा गया है।

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