Titanic कैसे डूबा था? क्या वजह थी उसके डूबने की, देखिए

टाइटैनिक के डूबने का मुख्य कारण अत्यधिक गति से चलना था। (टाइटैनिक) के मालिक जे. ब्रूस इस्मे ने जहाज के कप्तान एडवर्ड स्मिथ को जहाज को अत्यधिक गति से चलाने के लिए कहा था। 12 अप्रैल, 1912 को टाइटैनिक को 6 बर्फ की चट्टानों की चेतावनिया मिली थी।

अब तक के इतिहास में सबसे बड़े जहाज टाइटैनिक व्हाइट स्टार लाइनर की पहली यात्रा 14 अप्रैल, 1912 में आपदा में समाप्त हो गई थी।

ओलंपिक श्रेणी का यात्री लाइनर टाइटैनिक व्हाइट स्टार लाइन के हस्तगत में था और उसका निर्माण बेलफ़ास्ट (Ireland) के हरलैंड ओर वोल्फ शिपयार्ड में किया गया था। वह 2,223 यात्रिओ के साथ न्यूयॉर्क शहर के लिए रवाना हुआ था। यह तथ्य है कि जब जहाज डूबा उस वक्त, जहाज पर उस समय के सभी नियमों का पालन करने के बावजूद केवल 1,178 लोगों के लिए जीवनरक्षक नौका थी। पुरुषो के मृत्यु की असंगत संख्या का मुख्य कारण महिलाओं और बच्चों को पहले प्रधानता देना था।

टाइटैनिक के डूबने का मुख्य कारण अत्यधिक गति से चलना था। (टाइटैनिक) के मालिक जे. ब्रूस इस्मे ने जहाज के कप्तान एडवर्ड स्मिथ को जहाज को अत्यधिक गति से चलाने के लिए कहा था। 12 अप्रैल, 1912 को टाइटैनिक को 6 बर्फ की चट्टानों की चेतावनिया मिली थी। कप्तान को लगा की बर्फ की चट्टान (Ice Berg) आने पर जहाज मुड जाएगा।

परन्तु बद्किस्मती से जहाज बहुत बड़ा था और राडार छोटा था। बर्फ की चट्टान आने पर वह अधिक गति के कारण समय पर नहीं मुड पाया और चट्टान (एक अनुमान के मुताबिक यह चट्टान करीब 10,000 साल पहले ग्रीनलैंड से अलग हुई थी) से जा टकराया। जिससे जहाज के आगे के हिस्से में छेद हो गए और लगभग 11:40 p.m. पर वो डूबने लगा। तक़रीबन 2:20 a.m. पर वो पूरा समुन्द्र में समां गया। जिस सागर में वह डूबा था उसके जल का तापमान -2℃ था जिसमें किसी साधारण इंसान को 20 मिनट से ज़्यादा जिन्दा रहना नामुमकिन था।

न्यूयॉर्क में व्हाइट स्टार के अधिकारियों ने घोषणा की कि एक संदेश प्राप्त हुआ था जिसमें कहा गया था कि टाइटैनिक कल सुबह 2.20 बजे डूब गया जब उसके सभी यात्रियों और चालक दल को दूसरे जहाज में स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि कई लोगों की जान चली गई थी। केप रेस, न्यूफ़ाउंडलैंड से एक अनौपचारिक संदेश में कहा गया था कि बोर्ड पर 2,200 से 2,400 व्यक्तियों में से केवल 675 को बचाया गया है।

यह कुछ हद तक बाद में लिवरपूल में व्हाइट स्टार के अधिकारियों द्वारा पुष्टि की गई थी, जिन्होंने कहा था कि उन्हें डर था कि रिपोर्ट सच साबित होने की संभावना है। यह मानते हुए कि केवल 675 यात्रियों और चालक दल को बचाया गया है, और बोर्ड पर लोगों की संख्या का सबसे छोटा अनुमान लेते हुए, आपदा नेविगेशन के इतिहास में सबसे भयानक में से एक है, क्योंकि कम से कम 1,500 लोगों की जान चली गई है।

टाइटैनिक उस समय के सबसे अनुभवी इंजीनियरों के द्वारा डिजाइन किया गया था और इसके निर्माण में उस समय में उपलब्ध सबसे उन्नत तकनीकी का इस्तेमाल किया गया था। यह कई लोगो के लिए एक बड़ा आघात था कि व्यापक सुरक्षा ओर सुविधाओं के बावजूद, टाइटैनिक डूब गया था। आवेश में आयी हुई मीडिया की ओर से टाइटैनिक के प्रसिद्ध आरोपी, जहाज के डूबने का उपाख्यान, समुद्री कानूनों का भंग ओर जहाज के मलबे की खोज ने लोगो की टाइटैनिक में रुचि जगाने में काफी योगदान दिया।

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