सच्चा मित्र (The Story of True Friend)

एक गांव में सोनू और मोनू नाम के दो मित्र रहते थे। वह दोनों बहुत ही बहादुर थे। सोनू ने महल में सभा के दौरान अपने राजा के अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई। राजा बहुत ही कठोर और निर्दयी था।

सच्चा मित्र (The Story of True Friend)

एक गांव में सोनू और मोनू नाम के दो मित्र रहते थे। वह दोनों बहुत ही बहादुर थे। सोनू ने महल में सभा के दौरान अपने राजा के अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई। राजा बहुत ही कठोर और निर्दयी था। स्वयं के प्रति बगावत का सुर सुनते ही राजा ने सोनू को फांसी के तख्ते पर लटकाने की आज्ञा दी।

सोनू ने राजा से विनती की, "आप जो कर रहे हैं वह ठीक है। मैं खुशी से मौत की गोद में चला जाऊंगा, लेकिन आप मुझे कुछ देर कि मोहलत दे दीजिए, जिससे मैं गांव जाकर अपने बच्चों से मिल आऊं।"

राजा ने कहा- "नहीं, मैं तुम्हारी बात पर कैसे विश्वास करू?"

सोनू का मित्र मोनू वहां मौजूद था। मोनू आगे आकर बोला, "मैं अपने मित्र की जमानत देता हूं। अगर यह लौटकर न आए तो आप इसके बदले मुझे फांसी पर चढ़वा देना।"

राजा आश्चर्यचकित रह गया, उसने अपने जीवन में ऐसा कोई आदमी नहीं देखा था, जो दूसरों के लिए अपनी जान देने को तैयार हो जाए।

राजा ने सोनू की विनती को स्वीकार करते हुए, उसे छ: घण्टे की मौहलत दी गई। सोनू घोड़े पर सवार होकर अपने गांव को रवाना हो गया और उसके मित्र मोनू को कारागाह में बंद कर दिया गया।

सोनू ने हिसाब लगाकर देखा कि वह लगभग पांच घंटे में लौट आएगा, लेकिन बच्चों से मिलकर वापस आते वक्त उसका घोड़ा ठोकर खाकर गिर गया और घायल हो जाने के कारण वह उठ नहीं सका। सोनू के भी बहुत चोटें आई, पर उसने एक पल के लिए भी हिम्मत नहीं हारी।

छ: घण्टे का समय भी बीत गया, किंतु वह सोनू नहीं लोटा, तो मोनू बहुत खुश हुआ। वह निरंतर ईश्वर से प्रार्थना करने लगा कि उसका मित्र वापिस न लौटे। फाँसी का समय हो चुका था। मोनू को फांसी के तख्ते के पास लाया ही गया था कि सोनू वहां पहुंच गया।

सोनू ने अपने मित्र से कहा- "लो मैं आ गया, अब मुझे विदा दो और तुम घर जाओ।"

मोनू ने कहा- "यह नहीं हो सकता, तुम्हारा समय काल पूरा हो गया है।"

सोनू ने कहा- "यह तुम क्या कह रहे हो! सजा तो मुझे मिली है।"

दोनों मित्रों की दोस्ती को राजा बड़े गौर से देख रहा था। यह देख राजा का मन भी पिघल गया, उसकी आंखें भर आईं। उसने उन दोनों को बुलाकर कहा- "तुम्हारी दोस्ती ने मेरे दिल पर गहरा प्रभाव डाला है। जाओ, मैनें तुम्हें माफ किया।"

उस दिन से राजा ने कभी किसी पर अत्याचार नहीं किया।

 

कहानी से सीख: इस से हमें यह सिख मिलती है कि तुम्हारा सच्चा मित्र वही जो बुरे समय तुम्हारा साथ दे, और तुम्हें कभी मुश्किल समय में हमेशा साथ दे।

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