अक्ल बड़ी या मेहनत की कहानी (The Story of Wisdom)

एक शहर मैं अंकित और नीरज नाम के दो दोस्त रहते थे। दोनों बहूँत अच्छे दोस्त थे। दोनों ने साथ मैं अपनी पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई मैं अच्छे मार्क्स की वजह से अंकित और नीरज को अच्छी कंपनी मैं जॉब मिलती है।

अक्ल बड़ी या मेहनत की कहानी (The Story of Wisdom)

एक शहर मैं अंकित और नीरज नाम के दो दोस्त रहते थे। दोनों बहूँत अच्छे दोस्त थे। दोनों ने साथ मैं अपनी पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई मैं अच्छे मार्क्स की वजह से अंकित और नीरज को अच्छी कंपनी मैं जॉब मिलती है।

दोनों ने तय किया था की अब हम अच्छे से काम करेंगे और अपना जीवन और भी अच्छा बनायेगे।

एक दिन कंपनी की कैंटीन मैं चाय पीते-पीते दोनों दोस्त बाते कर रहे थे नीरज ने अंकित को कहा- "इस बार पक्का मुझे ही प्रमोशन मिलेगा तुम देख लेना मैं मेहनत जो इतनी करता हूँ।"

अंकित ने कहा- "लगता है मुझे ही बॉस प्रमोशन देंगे।"

नीरज ने कहा- "मैं तुमसे ज्यादा मेहनत करता हूँ इसलिए तुम अपना प्रमोशन अगले साल ही सोचना इस बार तो मुझे ही मिलेगा।"

अंकित ने कहा- "अच्छा ठीक है देखते है क्या होता है।"

कुछ देर के बाद बॉस ने बताया कि इस बार किस-किस को प्रमोशन मिला है। लेकिन उसमे तो सिर्फ अंकित का ही नाम था नीरज का नहीं था। ये सुनकर नीरज को बहूँत गुस्सा आता है और वो सीधा बॉस के पास जाता है और उनसे कहता है कि मैं नौकरी छोड़ रहा हूँ।

बॉस ने नीरज से पूछा, "क्यों? ऐसा क्या हूँआ की तुमको जॉब छोड़ना है?"

नीरज ने अपने बॉस से पूछा, "आपने मुझे इस बार प्रमोशन क्यों नहीं दिया? मैं तो अंकित से भी ज्यादा मेहनत करता हूँ फिर भी आपने मुझे प्रमोशन नहीं दिया और अंकित को दे दिया।"

बॉस ने नीरज से कहा- "मैं तुमको एक काम दूंगा। अगर तुमने वो काम अच्छे से किया तो फिर मैं तुम्हे प्रमोशन भी दूंगा और अंकित से भी अच्छी सैलरी दूंगा।"

नीरज ने कहा- "अच्छा ठीक है मैं वो काम करने के लिए तैयार हूँ।"

बॉस ने कहा- "अच्छा ठीक है, तुम बाजार में जाओ और ये पता लगाओ की बाजार में कौन-कौन आम बेच रहा है?"

नीरज ने कहा- "अच्छा ठीक है।"

नीरज बाजार में जाकर देखता है कि बाजार में तो सिर्फ एक ही आदमी आम बेच रहा है।

वो वापिस अपने बॉस के पास आता है और उनसे कहता है, "बाजार में सिर्फ एक ही आदमी आम बेच रहा है।"

अब बॉस उससे कहता है, "तुम वापिस बाजार जाओ और ये पता लगाके आओ की वो आदमी आम कितने दाम में बेच रहा है।"

नीरज वापिस बाजार में जाता है और आम का भाव जान के आता है और अपने बॉस को बताता है कि वो आदमी 100 रुपये प्रति किलो के दाम से आम बेच रहा है।

अब बॉस नीरज से कहते है, "तुम यही खड़े रहो, मैं अंकित को ये काम करने के लिए बुलाता हूँ।"

बॉस ने अब अंकित को बुलाया और उससे कहा- "तुम बाजार जाओ और ये पता लगाकर लाओ की बाजार में कौन-कौन आम बेच रहा है।"

अंकित बाजार जाता है और देखता है, वहां पर सिर्फ एक आदमी ही आम बेच रहा था। वो उनसे आम के भाव पूछता है और वापिस बॉस के पास आता है।

अंकित बॉस से कहता है, "बाजार में सिर्फ एक ही आदमी 100 रूपये प्रति किलो के भाव से आम बेच रहा है। अगर हम उनसे 10 किलो आम ले ले तो वो हमें 90 रूपये प्रति किलो के भाव से देंगे। इस तरह हम 90 रूपये प्रति किलो में लेकर 100 रूपये प्रति किलो से बेचकर मुनाफा कमा सकते है।"

नीरज भी ये सब देख रहा था और वो ये सब देखकर हैरान रह जाता है। नीरज अब अपने दिमाग में से जॉब छोड़ने की बात को निकाल देता है और फिर से काम में जुड़ जाता है।

कहानी से सीख: यह कहानी हमें यह बताती है कि मेहनत हमें अक्ल के साथ करनी चाहिए। बिना अक्ल के मेहनत किसी काम में उपयोगी नहीं होती है।

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